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आज हम भारतीय स्थापत्य कला (Temple Architecture) के एक ऐसे रोमांचक अध्याय पर चर्चा करेंगे जो सुनने में तो गणित जैसा लगता है, लेकिन असल में यह मंदिर की “आत्मा” से जुड़ा है। क्या आपने कभी सोचा है कि प्राचीन मंदिरों में प्रवेश करते ही एक सकारात्मक ऊर्जा और शांति क्यों महसूस होती है? इसका एक बड़ा कारण है—आयादि गणित (Ayadi Calculation)।

शिल्प शास्त्रों के अनुसार, मंदिर या भवन का निर्माण केवल ईंट-पत्थर जोड़ना नहीं है, बल्कि उसे एक ‘जीवित इकाई’ बनाना है। आइये, स्रोतों के आधार पर इस प्राचीन विज्ञान को आसान भाषा में समझते हैं।

भवन की जन्म-कुंडली: आयादि गणित

जैसे इंसान की जन्म-कुंडली होती है, वैसे ही शिल्प शास्त्र में भवन की कुंडली बनाई जाती है। इसे ही आयादि षड्वर्ग कहते हैं। इसमें मुख्य रूप से ६ या उससे अधिक कारक देखे जाते हैं, जैसे—आय, व्यय, नक्षत्र, तिथि, वार, और अंश। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मंदिर या घर की लंबाई और चौड़ाई (Dimensions) ब्रह्मांडीय ऊर्जा और यजमान (मालिक) के नक्षत्रों के अनुकूल हो,।

"आय" और "व्यय" का खेल

आयादि गणित का सबसे दिलचस्प और महत्वपूर्ण नियम है—आय (Income) और व्यय (Expenditure)।

स्रोतों में स्पष्ट लिखा है कि भवन का निर्माण करते समय यह गणना करनी चाहिए कि उसकी ‘आय’, उसके ‘व्यय’ से अधिक हो। यह नियम केवल पैसों के लिए नहीं, बल्कि ऊर्जा (Energy) के लिए भी है।

यदि आय > व्यय (आय, व्यय से अधिक है)

तो वह भवन सुख, समृद्धि और शांति लाएगा।

यदि व्यय > आय (व्यय, आय से अधिक है)

तो उस भवन में रहने वाले या पूजा करने वाले की ऊर्जा और धन का क्षय होगा।

इसीलिए, लंबाई और चौड़ाई का गुणा करके क्षेत्रफल निकाला जाता है और फिर विशिष्ट सूत्रों से यह चेक किया जाता है कि बची हुई संख्या (Remainder) शुभ है या नहीं।

८ प्रकार की 'आय' (The 8 Ayas)

शिल्प ग्रंथों में ८ प्रकार की ‘आय’ का वर्णन है, जो विभिन्न दिशाओं और पशु-पक्षियों के नाम पर हैं। स्रोतों के अनुसार, इनमें से कुछ अत्यंत शुभ हैं और कुछ अशुभ:

ध्वज आय (Flag)

यह पूर्व दिशा से संबंधित है और सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। यह हर तरह के निर्माण (मंदिर, घर, महल) के लिए शुभ है।

2. धूम आय (Smoke)

यह अशुभ है, इसे त्याग देना चाहिए।

3. सिंह आय (Lion)

यह दक्षिण दिशा की है। यह भी शुभ है, विशेषकर विजय और शक्ति के लिए।

4. श्वान आय (Dog)

अशुभ।

5. वृषभ आय (Bull)

पश्चिम दिशा। यह पशुधन और समृद्धि के लिए शुभ है।

6. खर आय (Donkey)

अत्यंत अशुभ।

7. गज आय (Elephant)

उत्तर दिशा। यह लक्ष्मी और धन के लिए बहुत शुभ मानी जाती है।

8. ध्वांक्ष आय (Crow)

अशुभ।

सीधा नियम: हमें हमेशा ध्वज, सिंह, वृषभ या गज आय वाला नाप ही चुनना चाहिए। ध्वज आय को ‘सार्वभौमिक’ माना गया है, यानी अगर दुविधा हो, तो ध्वज आय (विषम संख्या) का चयन करना सबसे सुरक्षित है।

अगर नाप सही न हो तो?

यही तो हमारे प्राचीन वास्तुविदों (Architects/Sutradharas) की कुशलता थी! यदि जमीन की लंबाई-चौड़ाई का गुणा-भाग करने पर ‘खर’ या ‘कौआ’ जैसी अशुभ आय आ रही हो, तो वे निर्माण को रद्द नहीं करते थे।

स्रोतों के अनुसार, वे माप में कुछ अंगुल (Angulas) या इंचों का बदलाव कर देते थे। लंबाई या चौड़ाई को थोड़ा बढ़ाकर या घटाकर ऐसी संख्या लाते थे जिससे ‘ध्वज’ या ‘सिंह’ जैसी शुभ आय प्राप्त हो। इसे ‘आय विचार संशोधन’ कहा जाता है।

निष्कर्ष

तो अगली बार जब आप किसी प्राचीन मंदिर को देखें, तो याद रखिएगा कि उसकी दीवारों की लंबाई-चौड़ाई इत्तेफाक नहीं है। वह एक गहरी गणना (Ayadi Ganita) का परिणाम है, जिसका उद्देश्य आपको धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान करना है।

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Written by

RK Sompura

Mr. RK Sompura is a renowned personality in the Hindu and Jain Nagar Sheli temple architecture and construction industry. He carries forward a rich legacy of ancestral knowledge in temple design, building, and renovation, passed down through generations of his family. With his deep expertise and dedication, he has contributed to the construction of multiple magnificent temple structures across various parts of India, preserving traditional craftsmanship while enhancing the spiritual and architectural heritage of the region.