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नमस्ते दोस्तों! जब भी हम भारत के भव्य मंदिरों की बात करते हैं, तो एक नाम अपने आप जुड़ जाता है – सोमपुरा समुदाय! लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हज़ारों सालों से पत्थर को तराशकर, जो शिल्पकार मंदिर निर्माण की अलौकिक कला को जीवित रखे हुए हैं, उनकी उत्पत्ति का रहस्य कहाँ छिपा है? यह कहानी किसी कल्पना से कम नहीं, बल्कि सीधे देवताओं के लोक से जुड़ी हुई है, और इसका पहला कदम पड़ा था गुजरात की एक पवित्र भूमि पर!

चंद्रमा की प्रार्थना और सोम यज्ञ की कथा

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चंद्र देव का निर्माण: सोमपुरा समुदाय की जड़ें स्कंद पुराण के गहरे पन्नों में हैं । पौराणिक कथा बताती है कि चंद्रमा (सोम देव) ने अपने पापों का प्रायश्चित करने और भगवान शिव की अर्चना के लिए एक विशेष सोम यज्ञ करने का निर्णय लिया । इस महान यज्ञ को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए, चंद्रमा ने दिव्य लोक से अग्निहोत्री ब्राह्मणों को पृथ्वी पर आमंत्रित किया । ये ब्राह्मण, चंद्रलोक के मुख्य सचिव हेमगर्भ के साथ, प्रभास पट्टन (वर्तमान सोमनाथ) की पवित्र धरती पर पहुँचे!

सोमपुरा” नाम का अर्थ और उनका चिरस्थायी निवास

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यह यज्ञ, सोमनाथ मंदिर के पहले ज्योतिर्लिंग की प्रतिष्ठापना के लिए किया गया था । यज्ञ समाप्ति के बाद, चंद्र देव ने उन ब्राह्मणों से वहीं स्थायी रूप से बसने का अनुरोध किया । इन ब्राह्मणों ने चंद्र की इच्छा का सम्मान किया और वे वहीं पर बस गए। इसी कारण, वे सोमपुरा ब्राह्मण कहलाए – जिसका सीधा अर्थ है: “वे जो सोम लोक से आए और सोमनाथ के निकट ‘पुर’ (नगर) में बस गए”। हज़ारों वर्षों तक, यह समुदाय बिना बड़े प्रवास के इसी पवित्र स्थान पर टिका रहा, जो भारतीय सभ्यता के इतिहास में एक दुर्लभ घटना है!

शिल्पकारिता की ओर यात्रा: एक दिव्य प्रेरणा

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लेकिन ये पुरोहित भव्य शिल्पकार कैसे बन गए? शास्त्रों का ज्ञान, विशेषकर वास्तु शास्त्र और शिल्प शास्त्र का, इन्हें परंपरागत रूप से प्राप्त था । इनके गुरु स्वयं देवों के शिल्पकार, विश्वकर्मा थे। पद्मश्री प्रभाशंकर ओघडभाई सोमपुरा की ‘प्रतिमा कलानिधि’ में भी उन्हें ‘पञ्चमुख विश्वकर्मा’ के रूप में पूजित दिखाया गया है । यही दिव्य प्रेरणा इन्हें मंत्रों के ज्ञान से पत्थरों के ज्ञान की ओर ले गई, जहाँ उन्होंने स्थापत्य कला को विज्ञान और आध्यात्म का अद्भुत संगम बना दिया।

सोमपुरा समुदाय के इस आदिम इतिहास पर आपका क्या विचार है? क्या यह किसी दैवीय आशीर्वाद की कहानी नहीं लगती? अपनी राय कमेंट्स में ज़रूर बताएं! मैं अगले भाग में उनके स्थापत्य कला के अद्भुत रहस्यों पर चर्चा करूँगा!

Written by

RK Sompura

Mr. RK Sompura is a renowned personality in the Hindu and Jain Nagar Sheli temple architecture and construction industry. He carries forward a rich legacy of ancestral knowledge in temple design, building, and renovation, passed down through generations of his family. With his deep expertise and dedication, he has contributed to the construction of multiple magnificent temple structures across various parts of India, preserving traditional craftsmanship while enhancing the spiritual and architectural heritage of the region.